2013 ഡിസംബർ 6, വെള്ളിയാഴ്‌ച

दिल्ली के बाद क्या होगा

पार्टी का अस्तित्व अन्ना हजारे के नेतृत्व में जन लोकपाल आंदोलन के समय आया जब देश के विभिन्न क्षेत्रों से लाखों लोग सार्वजनिक स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ इस आंदोलन से जुड़े, सोशल मीडिया फेसबुक, ट्विटर, ब्लोग वगैरह को धन्यवाद देना चाहिए जिसने इस आंदोलन को हवा दी। ए.ए.पी ने स्थापना के समय से ही विभिन्न जाति, संस्कृति और धर्म के लोगों के बीच पैठ बनाने में कामयाबी पाई है
पार्टी सत्ता में आए, चाहे न आए, योगेंद्र यादव कहते हैं कि वे 'खेल के नियम' बदलने में पहले ही कामयाब हो चुके हैं।
योगेंद्र कहते हैं, "आज से एक साल पहले रॉबर्ट वाड्रा (कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद) का नाम लेने में मीडिया वाले डरते थे, राजनेता भी डरते थे। जिस तरह के घोटाले देश में हो रहे थे, उसकी चर्चा नहीं होती थी।"
उनके अनुसार "एक चुप्पी की अदृश्य दीवार टूटी है और मेरे लिए कम से कम यह किसी भी चुनावी सफलता से ज़्यादा अहम है। देश की राजनीतिक संस्कृति में जो बदलाव आया है, वह यह है। इसमें हमारी विजय है।"

दिल्ली में हार की सवाल पैदा ही नहीं होता। एक साल में आमआदमी पार्टी को इतना कठिनाइयों पार करना पडा उतना कठिन नहीं नहीं होगा आगे की रास्ता। अन्य राज्यों में अधिकार और पैसे की लालची लोग ए.ए.पी में शामिल हो गये हैं आसान तरीके से नए सदस्यों को गलत रास्ता दिखा रहे हैं। उनके प्रथम कर्तव्य यह हैं ग्राम सभा तक पहूँचना हैं। किसी भी माध्यम हमारे मदद केलिये नहीं आयेगा। क्यों कि हर माध्यम किसी न किसी पार्टी की सम्पत्ती हैं। ए.ए.पी सैट पर किसी भी व्यक्ती को दस रुपया भेजकर सदस्य बन सकता हैं। लेकिन हर जिल्ले की यह कर्तव्य होता हैं उनके बारे में सही विवरण का पता लगाना हैं। एक सदस्यता रजिस्टर उनके नाम, पिता या माता के नाम, धर का नाम और विधान सभा निरवाचन क्षेत्र मालूम होने से राज्य निर्वाचन आयोग की सैट में प्रवेश करके जाँच कर सकता हैं। साथ ही जिन्हे इन्टेरनेट की सुविधा नहीं हैं उनको ए.ए.पी के सैट में जाकर दस रुपया भरकर सदस्य बनाना चाहिये।
हर गाँव में सभाओं के सौलियत कराकर आम जनता को ए.ए,पी के लक्ष्य के बारे में जानकारी देना जरूरि हैं। आज हर पार्टी की ताकत नेत्त्व में निरभर हैं। ए.ए.पी एक ऐसे पार्टी हैं जो आम जनता को राज्सपाल संभालने की मौका प्रदान कर रहा हैं। ग्राम सभा से शुरू करके लोकसभा तक आम जनता की पैसे इकटा करके हर चुनाव की सामना करेगा। जो भी पार्टी को पैसा दाता वह बात ए.ए.पी के सैट पर उपलब्द हैं। बाकी पार्टियाँ अमीरों से बहूत पसे इकटा करके चुनाव लडने के बाद उनके नैकर बनकर पाँच साल राज्यभाल संभालेगा। काला धन विदेशी बाँकों में जमाकरके इन नेताओं ने देश को लूटा हैं। ए.ए.पी आम जनता की मदद से इस व्यवस्ता को बदल डालेगा।

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